माना कि जिन्दगी को
घोर निराशाओं ने घेरा है।
दूर क्षितिज की ओर देखो
आने वाला एक नया सवेरा है।
फैलने दो आशा की किरण को
जिन्दगी रूपी जमीं पर
तुम्हारे आस-पास ही कहीं
तुम्हारी खुशियों का बसेरा है।
क्यों निराश होते हो तुम
ये तो माया जाल है
चन्द दिनों की है ये दुनिया
फिर क्या तेरा और क्या मेरा है।
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