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Sunday, November 7, 2010

मेरा दिल तेरा हो गया है


ना जाने मेरा दिल कहां खो गया है
आज पहली बार समझ में आया कि
मेरा दिल तेरा हो गया है।
खो गई इन आंखों की नीन्द
और चैन कहीं खो गया है।
आज पहली बार समझ में आया कि
मेरा दिल तेरा हो गया है।
जाड़े कि गुनगुनी धूप में
बारिश की हरेक बून्द में
तेरा ही अक्स नज़र आता है
फूलों की खुश्बू में भी तुम हो मुझे पता है।
जबसे तुम्हें देखा
सारा समां रंगीन हो गया है।
आज पहली बार समझ में आया कि
मेरा दिल तेरा हो गया है।
हर पल चाहे मेरा दिल
तुझको ही देखा करूं
जब तुम नहीं हो मेरे पास
तुमको ही सोचा करूं।
ये प्यारा-प्यारा चेहरा जिस दिन से देखा है,
ज़िन्दा हूं पर जां कोई और ले गया है।
आज पहली बार समझ में आया कि
मेरा दिल तेरा हो गया है।

Thursday, November 4, 2010

दिवाली

सभी को दिपावली की शुभकामनाएं





ना जाने इस बार ये
कैसी दिवाली आई है
कैसे खरीदे खील-बताशे
कमरतोड़ महगॉंई है।


दिवाली तो कुछ लोगों के लिए है
बाकी का निकला दिवाला है
कैसे सजाएं पुजा की थाली
मुंह से भी दूर निवाला है।

फुलझड़ियॉं, राकेट और पटाखे
कहॉं से ये सब लाउं मैं
राह देखते होगें बच्चे
कैसे अब घर जाउं मैं।

फिर भी दरवाजे पर मैंने
आशा का एक दीप जलाया है
आएगी अपने घर भी खुशियॉं
दिल को यही समझाया है।

Tuesday, November 2, 2010

वो लड.की



उसको देखता हूं तो लगता है यूं
जैसे सुबह की लालिमा लिए
आसमां की क्षितिज पर
एक तारा टिमटिमा रहा हो।
उसकी खामोश निगाहें
कुछ कहना चाहती है मुझसे
होठों पर है ढेर सारी बातें
फिर भी न जाने क्यूं चुप है।
हंसती है वो तो
चमन में फूल खिलते हैं।
बात करती है तो लगता है
दूर कहीं झरने बहते हैं।
उसकी शोख और चंचल अदाएं
मुझको दिवाना बनाती है।
उसकी सादगी हर पल
एक नया संगीत सुनाती है।
इतना तो पता है कि
उसको भी मुझसे प्यार है।
कभी तो नज़र उठेगी मेरी तरफ,
उस वक्त का इन्तजार है।

Thursday, October 28, 2010

कितने दूर, कितने पास



बैठा हूं शब के अंधेरे में
तेरी यादों को सीने से लगाए।
पहरों बीत गए
फलक पर निकल आया है चांद।
उसकी चांदनी कांटों की तरह चूभ रही है
मेरे दिल के किसी कोने में।
वो मुस्कुरा रहा है मेरी बेबसी पर
जैसे वो कह रहा हो मुझसे
छोड. दो जिद मुझे पाने की
क्या हुआ जो तुम मुझसे प्यार करते हो।
शाम होते ही तुम मेरा इन्तजार करते हो।
मेरा हमसाया तो ये आसमां है
इसके सिवा मुझे और जाना कहां है
मत देखो मुझे इन प्यार भरी नज़रों से
मेरे अक्स के सिवा
तुम कुछ और नहीं पाओगे
तड.पोगे तुम और
टूटकर बिखर जाओगे।
मुझे लगा
चांद और तुममें कितना फर्क है
वो दूर होते हुए भी
सबके कितने करीब है।
और हम
करीब होते हुए भी
कितने दूर हैं।

Monday, October 25, 2010

जुल्म की इन्तेहा

मैंने तुम्हे चाहा
ये मेरे इश्क की इब्तदा थी
अब देखना ये है कि
तेरे जुल्म की
इन्तेहा क्या है।

Saturday, October 23, 2010

लघु कथा

एक प्यारी सी खुबसुरत लड.की थी। वह बचपन से ही अंधी थी। उसे हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड.ता था। हर काम में उसे दूसरों की सहायता लेनी पड.ती थी। एक लड.का था जो हमेशा उसकी मदद किया करता था तथा उसकी हर जरूरत के वक्त उसके साथ खड.ा रहता था। वो लड.की हमेशा उससे कहती थी कि अगर उसकी ऑंखें होती तो वह उससे शादी कर लेती। एक दिन की बात है कि किसी ने उस अंधी लड.की अपनी ऑंखें दान कर दी। उस लड.की को ऑपरेशन के द्वारा वो ऑंखें लगा दी गई। कुछ दिनों के बाद जब वो ठीक होकर अस्पताल से घर आई तो उस लड.के से मिली जो हमेशा उसकी मदद किया करता था। उसने देखा कि वो लड.का अंधा था। उस लड.के ने उस लड.की से पूछा- क्या अब वो उससे शादी करेगी। लड.की ने जवाब दिया - नही! मैं एक अंधे लड.के से कैसे शादी कर सकती हुं। मेरी तो पुरी जिन्दगी खराब हो जाएगी। वो लड.का मुस्कुराया और उसने लड.की को  एक कागज टुकड.ा दिया और हमेशा के लिए उसकी जिन्दगी से चला गया। उस कागज पर लिखा था `मेरी ऑंखों का ख्याल रखना´।

Tuesday, October 19, 2010

दिल के अरमान



मैनें लिख कर दी थी तुम्हे
अपनी चन्द कविताएं।
शब्दों की जगह
उकेरे थे मैनें
अपने जज्बात।
निकाल कर रख दिए थे मैनें
कागज के एक
छोटे से टुकडे. पर
अपने दिल के सारे अरमान।
इस ख्याल में कि
शायद
मेरी पाक मोहब्बत
तेरे दिल की गहराईयों तक
पैबस्त हो जाए।
पर मेरे सारे जज्बात
हर्फ-दर-हर्फ
बिखर गए।
जब मैंने ये जाना कि
तुम्हारी जिदंगी में
मेरी जगह
किसी और ने ले ली है।