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Tuesday, March 13, 2012

हैं कितने कमाल के हम...........


चित्र गूगल साभार 




नेता जी] नेता जी एक बात बताईये
ये मामला क्या है जरा हमें भी समझाईये।

मंत्री बनने से पहले आपके घर में फॉके बरसते थे
धोती तो क्या आप लंगोट को भी तरसते थे।

ये कैसी आपने जादू की छड़ी घुमाई है
हम सभी को छोड़ लक्ष्मी आपके द्वार आई है।

हम तो अभी भी पैदल ही सफर करते है
आप तो अब जमीं पर पॉंव भी नही रखते है।

नेता जी बोले धत्त पगले क्यों मजाक करता है
हम शरीफों पर क्यों बेवजह दोष मढ़ता है।

हम तो जनता के सेवक है जनता का दिया खाते है
जो बच जाता है उसे दुसरे देश **स्वीस बैंक** भिजवाते है।

हम तो बसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करते है
इसलिए तो देश की संपत्ति को अपना समझते है।

सादगी और सद्भावना की जिंदा मिसाल है हम
अब समझ में आया कि हैं कितने कमाल के हम।


Sunday, February 26, 2012

कुछ बेतुकी बातें ......................


चित्र गूगल साभार 


अक्षरों से मिलकर
शब्द बनते हैं
शब्दों से मिलकर वाक्य।
वाक्यों से मिलकर
अहसास पुरे होते हैं और
अहसासों से मिलकर जज्बात।
जज्बातों से मिलकर
ख़्याल बनता है
और ख़्यालों से मिलकर
बनती है रचना।
जिन्हें हम कभी
कविता कहते है तो
कभी नज्म और
कभी गज़ल कहकर
पुकारते है तो कभी
छंद कहकर।
वास्तव में ये हमारी
सोच और ख़्याल का ही तो
प्रतिरूप है।
अक्स है
हमारी खुशी और ग़म का
हमारे अकेलेपन और
तन्हाईयों का।
दिल की गहराईयों में
दफ्न हो चुके
गुजरे हुए कल का।
हमारे आस-पास घटती
हर अच्छाई और
बुराई का।
जिन्हें हम
शब्दों की चाशनी में
लपेट कर
कोरे कागज की थाली में
परोस कर
आपके सामने रख देते हैं।

Thursday, February 16, 2012

बड़े दिलफरेब होते है ये जमाने वाले.....


चित्र गूगल साभार 



बड़े दिलफरेब होते है ये जमाने वाले
हॅस हॅस के मिले हमसे हमको मिटाने वाले।


तेरा दिल न सही दश्त ए वीरानियॉ तो है
वहीं आशियॉं बनायेंगें दिल को लगाने वाले।


कोई क्यों भरोसा करे मोहब्बत के इख्लास पे
दिल मेरा तोड़ गए हमें अपना बनाने वाले।


आवाजें भी तारीखों में दफन हो जाती हैं ‘अमित’
रोके कहॉ रूकते हैं कभी छोड़ कर जाने वाले।

Friday, February 3, 2012

तुमसे मिलना तो बस एक बहाना है......

चित्र गूगल साभार 




तुमसे मिलना तो बस एक बहाना है
दिल के जख्मों को तुम्हें दिखाना है।

कुछ इस कदर बिखरा है वजूद मेरा
न कहीं ठौर और न कहीं ठिकाना है।

ज़ज़्ब-ए-दुआ-ओ-ख़ैर कब की मर चुकी
खंजर की नोक पे खड़ा आज जमाना है।

रिश्तों की अहमियत को वो क्या जाने ‘अमित’
दिलों से खेलना जिनका शौक पुराना है।

Wednesday, January 25, 2012

अपने हाथों यूँ न करो र्निवस्त्र मुझे..........


कुछ दिनों से व्यस्तता की वजह से ब्लॉग से दूर हूँ जिसकी वजह से आपलोगों की रचनाओं को नहीं पढ़ पा रहा हूँ. आप लोगों के पास अपनी एक पुरानी रचना छोड़े जा रहा हूँ. इसे मैंने अगस्त महीने में ब्लॉग पर डाला था. जैसे ही समय मिलता है आप लोगो के पास वापस आ जाऊंगा. तब तक के लिए आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.



चित्र गूगल साभार 




रास्ते में मैने एक बुढ़िया को देखा बदहवास
ऑखों में था पानी और चेहरे से थी उदास।

पुछा कौन हो तुम और किसने किया तुम्हारा ये हाल
जिदंगी आगे और भी है जरा अपने आप को सभांल।

बोली बेटा अपना दर्द कैसे करू तुमसे बयान
कैसे दिखाउॅ तुम्हें अपने बदन पे जख्मों के निशान।

मेरे चाहने वाले ही मेरी हालत के जिम्मेदार हैं
कैसे कहूँ कि वो मेरे दुध के कर्जदार हैं।

मेरे बेटों ने ही मेरा ये हाल बनाया है
देखो किस तरह उन्होंने दुध का कर्ज चुकाया है।

मैने कहा चल मेरे साथ तेरा ये बेटा अभी जिंदा है
पोछ ले तु ऑंसु अपने क्यों खुद पे तु शर्मिन्दा है।

कहॉ ले जाओगे मुझे मैं एक लुटी हुई कारवॉं हूँ 
बेटा मैं और  कोई  नहीं  तेरी अपनी  ही भारत मॉं हूँ।

बख्श दो अब और न करो त्रस्त मुझे
अपने हाथों यूँ  न करो र्निवस्त्र मुझे।

Saturday, January 14, 2012

अजनबी से मोहब्बत का इजहार कर बैठे............


चित्र गूगल साभार 




अजनबी से मोहब्बत का इजहार कर बैठे
सरे राह अपनी मौत का इकरार कर बैठे।

दोस्तों की हमें कोई खबर न थी
दुश्मनों से मिले और प्यार कर बैठे।

हुआ कुछ इस कदर ये इत्फाक देखिए
नबीं को भी हम इनकार कर बैठे।

खामोश जिदंगी और अफ़सुर्दा चौबारे हैं
तन्हाई को तेरी यादों से गुलजार कर बैठे।

Saturday, January 7, 2012

मेरी दुआओं में कुछ असर तो हो........


चित्र गूगल साभार 



मेरी दुआओं में कुछ असर तो हो
जिदंगी थोड़ी ही सही बसर तो हो।

किसी के रोके कहॉ रूकते है हम
रोक ले मुझको ऐसी कोई नजर तो हो।

कितनी मुश्किलें हैं मंजिल के सफर में
सर छुपाने के लिए कोई शजर तो हो।

दस्त-ए-तन्हाई को ऑसुओं से सवॉरा है मैने
मुस्कुराहटों से भरी कभी कोई सहर तो हो।