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Saturday, December 10, 2011

ये फूल........





सुबह सुबह देखो तो 
इन फूलों की
पंखुड़ियों पर 
पानी की चंद 
नन्ही नहीं बुँदे
पड़ी होती हैं ।
तो क्या 
ये फूल भी 
किसी की याद में 
सारी रात रोती है।

Saturday, December 3, 2011

तुमसे प्यार करना मेरा सबसे बड़ा गुनाह हो गया


चित्र गूगल साभार 


तुमसे प्यार करना मेरा सबसे बड़ा गुनाह हो गया 
इस कदर मैने चाहा तुम्हें के खुद फना हो गया।

दिल पे जख्मों के निशॉं अभी बाकी है
हाथ में जाम है और सामने साकी है
इतनी पी मैनें के होश से जुदा हो गया
इस कदर मैनें चाहा तुझे के खुद फना हो गया।

इश्क वो सैलाब है जो हर दिल में उठती है
साहिल भी लहरों से मिलने को मचलती है
डुबा जो इसमें उसका निशॉ तक खो गया
इस कदर मैने चाहा तुझे के खुद फना हो गया।

हम भी कभी खुद पे नाज किया करते थे
न फिक्र थी कोई बस अपनी धुन में रहते थे
मिला जो तुमसे मै तो दाना से नादॉं हो गया
इस कदर मैने चाहा तुझे के खुद फना हो गया।

तुमसे प्यार करना मेरा सबसे बड़ा गुनाह हो गया
इस कदर मैने चाहा तुम्हें के खुद फना हो गया।

Friday, November 25, 2011

कभी तो हमसे मिला किजिए।


चित्र गूगल साभार 


कब से खड़ा हुॅ राहों में बस एक इल्तिजा लिए
गैर बनकर ही सही कभी तो हमसे मिला किजिए।

अब बर्दाश्त नहीं होता ये ग़म ए जुदाई का एहसास
मेरे इंतजार का अब कोई तो सिला दीजिए
गैर बनकर ही सही कभी तो हमसे मिला किजिए।

यॅू तो लाखों है आपकी राहो में इश्क ए चराग जलाए हुए
नजर भर कर कभी हमें भी देखा किजिए
गैर बनकर ही सही कभी तो हमसे मिला किजिए।

हम तो जॉ भी लुटा दें अपनी खुशी से
बस एक नजर देखकर हमें मुस्कुरा दीजिए
गैर बनकर ही सही कभी तो हमसे मिला किजिए।

और कुछ न मॉगेंगे हम खुदा से
हमें अपना हमसफर बना लिजिए
गैर बन कर ही सही कभी तो हमसे मिला किजिए।

Thursday, November 10, 2011

आज फिर महका है गुलिस्तॉ.......


चित्र गूगल साभार 


आज फिर महका है गुलिस्तॉ
और चमन में फुल खिले है।
ऑखें सबकुछ बोल रही है
हम दोनों के होठ सिले है।

कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो
हम कितनी मुद्धत बाद मिले हैं।
आओ भुला दें हम सभी 
दिल में जितने शिकवे गिले है।

कुछ इस तरह रातें बिताई है मैनें
जागती ऑखों से सपने बुने हैं।
चॉदनी रातों में जाग कर हमनें
ना जाने कितने तारे गिने है।


आज फिर महका है गुलिस्तॉ
और चमन में फुल खिले है।
ऑखें सबकुछ बोल रही है
हम दोनों के होठ सिले है।



Wednesday, November 2, 2011

मैं और मेरी कवितायेँ

चित्र गूगल साभार 



तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ
और मेरे बिना तुम ।
एक तुम ही तो हो
जो हर वक्त मेरे साथ रहती हो ।
मेरी तनहाइयों में भी
तुम्हारा वजूद इतनी मजबूती के साथ
अपना आभास करता है कि
मैं चाहकर भी तुम्हे नकार नहीं सकता ।
अपने हर सुख और दुःख को
ना जाने कब से मैं
तुम्हारे साथ साझा करता आ रहा हूँ ।
तुमने हर कदम
मेरा हौसला बढाया है ।
जब भी गिरा हूँ मैं
या फिर दुनिया वालों ने
जब सताया है
तुम्हारे पास ही तो
आया हूँ मैं ।
अपनी आगोश में लेकर
ना जाने कितनी बार
तुमने मुझे टूटने से
बचाया है ।
पहले लगता था
कि शायद
तुम मेरी सोच तक ही सीमित हो ।
लेकिन अब एहसास होता है कि
तुम्हारे बिना मेरा वजूद
हो ही नहीं सकता ।
हम दोनों आपस में
कुछ इस तरह से जुड़े हैं
जैसे शरीर के साथ
सांसों कि डोर ।
अक्सर कुछ इसी तरह की
बातें किया करते है
जब साथ होते हैं
मैं और मेरी कवितायेँ ।

Thursday, October 20, 2011

उनका ख़्याल तो आया


एक लंबे अतंराल के बाद एक बार फिर से आप सभी लोगों के साथ आना अच्छा लग रहा है। कुछ व्यस्तता थी जिसकी वजह से लगभग डेढ़ महीने नेट चलाया ही नही। अब एक बार फिर से आप सभी के पास आ गया हुं। आशा है आप सभी लोगों का स्नेह और प्यार पहले की तरह ही हमें मिलता रहेगा।



किसी से सुना था मैंने 
इस बार छुटि्टयों में
कुछ दिनों के लिए ही सही
तुम यहॉ आई थी।
सोए हुए ख्वाब
फिर से जाग गए।
दिल की गहराईयों में
फिर कहीं
एक आस की किरण
अपने पंख
फड़फड़ाने लगी।
इस ख़्याल से कि
कुछ पल के लिए ही सही
कम से कम
एकबार तो जरूर
मिलने आओगी।
प्यार के रिश्ते को ना सही
दोस्ती का रिश्ता तो
अवश्य निभाओगी।
निगाहें खुद ब खुद
उठ जाती थी
उन राहों पर
जिनसे तुम
गुजरा करती थी।
निगाहें
हर आने जाने वालों में
तुम्हारा चेहरा
तलाश करती थी।
दिन गुजरते गए
और हर गुजरते दिनों के साथ
मैं दिल को समझाता रहा
शायद अगले दिन
उससे मुलाकात हो।
अचानक तभी
उसने आकर बताया
तुम सबेरे वाली बस से
वापस चली गई।
मैंने  दिल को
तसल्ली दी (झुठी ही सही)
और खुद को बहलाया।
अरे क्या हुआ
जो वो नही आए
कम से कम उनका
ख़्याल तो आया।

Monday, August 29, 2011

जिंदगी की भी अजीब दास्तान होती है........


चित्र गूगल साभार



जिन्दगी की भी अजीब दास्तान होती है
हर गुजरता लम्हा मौत का फरमान होती है।

वक्त भी गर दगा दे तो कोई क्या करे
बहारों में भी चमन वीरान होती है।

धोखा और फरेब ही फितरत है जिनकी
ऐसे लोगों पर ही जिन्दगी मेहरबान होती है।

कहते हैं लोग के हम हबीब है तेरे
बुरे वक्त में ही उनकी पहचान होती है।

क्योंकर भरोसा किया हमनें उनपर जिनके
हाथों में खंजर और चेहरे पे मुस्कान होती है।