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Thursday, July 24, 2014

इश्क है, एक बार होता है, दोबारा तो नही,,,,,,,,,,,,,



इश्क में दूरियाँ एक पल को गवाँरा तो नही
इश्क है, एक बार होता है, दोबारा तो नही।

तेरी गलियाँ लिपटी है खून से ऐ मेरे कातिल
तड़प रहा है एक दिल तेरे दर पे, कहीं हमारा तो नही।

जिंदगी हँसती है कभी मेरी नाकामियों पर
तुम जीत कैसे गए अभी मैं हारा तो नही।

गुम था तेरे ख्यालों में तभी तेरा दीदार हुआ
रूको, जरा देखूँ, फलक से टूटा है कोई तारा तो नही।

10 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25.07.2014) को "भाई-भाई का भाईचारा " (चर्चा अंक-1685)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. बहुत सुंदर रचना...प्रेम को समर्पित भाव

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-07-2014) को ""क़ायम दुआ-सलाम रहे.." (चर्चा मंच-1686) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति........

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  5. बहुत बेहतरीन अंदाज़....

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  6. जिंदगी हँसती है कभी मेरी नाकामियों पर
    तुम जीत कैसे गए अभी मैं हारा तो नही।

    बहुत खूबसूरत अशआर के साथ लिखी ग़ज़ल

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