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Thursday, June 2, 2011


चित्र गुगल साभार



सजदे में जब उसने अपने हाथों को उठाया होगा
जेहन ‘ओ’ दिल में उसके मेरा ख्याल आया होगा।

तैर जाती है लबों पर उनकी हल्की तबस्सुम की लकीरें
हवाओं ने धीरे से जाकर मेरा हाल ‘ए’ दिल बताया होगा।

उनके रूखसारों पे आ गई जो लाली यक-ब-यक
उनकी महफिल में किसी ने मेरा जिक्र चलाया  होगा।

दिल ‘ए’ बेकरारी को वो किसे सुनाए मौला
कमरे में उसने एक आईना लगवाया होगा।

लोगों की नजरों से मुझे बचाने के लिए ‘अमित’
मेरे नाम को उसने हथेलियों में छुपाया होगा।




21 comments:

  1. दिल ‘ए’ बेकरारी को वो किसे सुनाए मौला
    कमरे में उसने एक आईना लगवाया होगा।

    वाह! क्या बात है सर!


    सादर

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  2. उनके रूखसारों पे आ गई जो लाली यक-ब-यक
    उनकी महफिल में किसी ने मेरा जिक्र चलाया होगा।
    खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर जबरदस्त , मुबारक हो .....

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  3. लोगों की नजरों से मुझे बचाने के लिए ‘अमित’
    मेरे नाम को उसने हथेलियों में छुपाया होगा
    bahut khoob .badhai swikar karen itni sundar bhavabhivyakti hetu .

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  4. दिल ‘ए’ बेकरारी को वो किसे सुनाए मौला
    कमरे में उसने एक आईना लगवाया होगा।
    बहुत सुंदर शेर...

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  5. सुन्दर प्रस्तुति.......!

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  6. बेहतरीन ग़ज़ल लिखी है आपने , ऐसे ही आपकी लेखनी समर्थ हो शुभकामनाये

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  7. This comment has been removed by a blog administrator.

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  8. वाह! ..अच्छा लिखते हैं आप...

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  9. बहुत ही सुन्दर !
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान

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  10. waah bahut sundar lekhni hai aapki....aabhar

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  11. तैर जाती है लबों पर उनकी हल्की तबस्सुम की लकीरें
    हवाओं ने धीरे से जाकर मेरा हाल ‘ए’ दिल बताया होगा।

    bahut khub....dil ko chu gaye aapki lekhni

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  12. तैर जाती है लबों पर उनकी हल्की तबस्सुम की लकीरें
    हवाओं ने धीरे से जाकर मेरा हाल ‘ए’ दिल बताया होगा।

    बहुत बढ़िया, विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  13. बहुत खूब लिखा है आपने.

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  14. बहुत ही खुबसूरत प्यार के अहसास समेटे ये पोस्ट....मैंने पहली वाली टिप्पणी हटा दी है वो गलती से मेरे ब्लॉग की बजाय आपके ब्लॉग पर लग गयी थी|

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  15. आपने कुछ नया नहीं लिखा ? मैं तो आपके नए पोस्ट के इंतज़ार में आया था...
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - स्त्री अज्ञानी ?

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  16. लोगों की नजरों से मुझे बचाने के लिए ‘अमित’
    मेरे नाम को उसने हथेलियों में छुपाया होगा।..

    वाह ... बहुत ही लाजवाब शेर है इस ग़ज़ल का ... बहुत उम्दा ..

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  17. behtareen ghazal k liye badhai...

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  18. बेहतरीन ग़ज़ल ...... सादर !

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  19. प्रेमरस से परिपूर्ण रचना....हर शेर मनमोहक

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