इस ब्लाग की सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है। बिना आज्ञा के इसका इस्तेमाल कापीराईट एक्ट के तहत दडंनीय अपराध होगा।

Tuesday, March 13, 2012

हैं कितने कमाल के हम...........


चित्र गूगल साभार 




नेता जी] नेता जी एक बात बताईये
ये मामला क्या है जरा हमें भी समझाईये।

मंत्री बनने से पहले आपके घर में फॉके बरसते थे
धोती तो क्या आप लंगोट को भी तरसते थे।

ये कैसी आपने जादू की छड़ी घुमाई है
हम सभी को छोड़ लक्ष्मी आपके द्वार आई है।

हम तो अभी भी पैदल ही सफर करते है
आप तो अब जमीं पर पॉंव भी नही रखते है।

नेता जी बोले धत्त पगले क्यों मजाक करता है
हम शरीफों पर क्यों बेवजह दोष मढ़ता है।

हम तो जनता के सेवक है जनता का दिया खाते है
जो बच जाता है उसे दुसरे देश **स्वीस बैंक** भिजवाते है।

हम तो बसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करते है
इसलिए तो देश की संपत्ति को अपना समझते है।

सादगी और सद्भावना की जिंदा मिसाल है हम
अब समझ में आया कि हैं कितने कमाल के हम।


20 comments:

  1. ये कैसी आपने जादू की छड़ी घुमाई है
    हम सभी को छोड़ लक्ष्मी आपके द्वार आई है...

    सही लपेटा है आज तो नेताजी को आपने ... ये लोग नेता बनते ही इसलिए हैं की लक्ष्मी बरसे ...

    ReplyDelete
  2. सादगी और सद्भावना की जिंदा मिसाल है हम
    अब समझ में आया कि हैं कितने कमाल के हम।
    .....बहुत ही बढ़िया व्यंग्य

    ReplyDelete
  3. हम तो बसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करते है
    इसलिए तो देश की संपत्ति को अपना समझते है।

    बहुत बढ़िया व्यंगात्मक रचना....

    ReplyDelete
  4. sunder rachna ....
    http://jadibutishop.blogspot.com

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आया ... सुंदर पोस्ट आप भी इधर मेरे ब्लॉग पर नहीं आये है

      Delete
  5. आपकी पोस्ट कल 15/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा मंच-819:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत धन्यबाद मेरी रचना को चर्चा मंच पर जगह देने के लिए.

      Delete
  6. आपसे सहमत शत प्रतिशत.....

    ReplyDelete
  7. बढ़िया लगी आपकी रचना अमितजी ..पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ

    ReplyDelete
    Replies
    1. इसी तरह अपना आशीर्वाद बनाये रखे.

      Delete
  8. लक्ष्मी जी उनके हिस्से हमारे हिस्से उल्लू जी..

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी हाँ बिलकुल सही.

      Delete
  9. बहुत सुंदर और सटीक व्यंग...

    ReplyDelete
  10. कल 16/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  11. हम तो बसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करते है
    इसलिए तो देश की संपत्ति को अपना समझते है।


    बहुत बढ़िया....
    एकदम सटीक.....

    ReplyDelete
  12. बहुत बढ़िया रचना...

    ReplyDelete