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Sunday, November 10, 2013

जख्म का क्या है कभी तो ये भर जाएगा...........


चित्र गूगल साभार






जख्म का क्या है कभी तो ये भर जाएगा
तेरे सितम का ऐ सितमगर निशाँ छोड़ जाएगा।

अश्क है, दर्द है और गम-ए-तन्हाई है
ईश्क है, देख अभी क्या-क्या गुल खिलाएगा।

अब्र का रिश्ता धरा से इस कदर है लिल्लाह
देखकर प्यासी उसे वो खुद ही बरस जाएगा।

बिक गया इन्साँ यहाँ कौड़ियों के दाम में
तेरे इस जहाँ में अब पत्थर ही पूजा जाएगा।

नींद और आँखों में अब दुश्मनी सी हो गई
ख्वाब इन आँखों में तेरे कौन अब सजाएगा।

11 comments:

  1. अच्छी रचना।
    वाह।

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  2. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  3. बढ़िया प्रस्तुति
    आदरणीय अमित जी-

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १२ /११/१३ को चर्चामंच पर राजेशकुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

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  5. नींद का रिश्ता उनसे ऐसा है ... वो नहीं आते तो नींद नहीं आती ख्वाब नहीं आते ...
    लजवाब शेर हैं सभी ...

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  6. उत्तम...इस प्रस्तुति के लिये आप को बहुत बहुत धन्यवाद...

    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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