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Thursday, August 18, 2011

तुम्हारी कमी सी है


चित्र गुगल साभार



सारा जहॉ साथ है मेरे
पर तुम्हारी कमी सी है
भीगा भीगा है समॉ
और ऑखों में नमी सी है।
खुशियों के बादल छॅट गए
गमों का खुला आसमान है
मिट गई जीने के ख्वाहिश
दिल की दुनिया वीरान है।
हैरॉ है मेरी ऑखे
और हम परेशान है
हम तुम्हें समझ न पाए
हम कितने नादान है।
जिन्दगी और मौत के
फासले सिमट गए
बस चंद सॉसे थमी सी है।
सारा जहॉ साथ है मेरे
पर तुम्हारी कमी सी है
भीगा भीगा है समॉ
और ऑखों में नमी सी है।

12 comments:

  1. खुशियों के बादल छॅट गए
    गमों का खुला आसमान है
    मिट गई जीने के ख्वाहिश
    दिल की दुनिया वीरान है।

    दिल के दर्द को आपने बहुत सुन्दरता से सामने रखा है ....आपका आभार

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  2. बहुत सुन्दर अभिवयक्ति....

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  3. कमी तो कमी ही रहेगी अमित जी सुंदर अभिव्यक्ति , बधाई

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  4. very nice......keep it up.

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  5. kisi ki kami ki khubsurat abhivaykti....

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  6. बहुत सुन्दर अभिवयक्ति..

    मिट गई जीने के ख्वाहिश

    को

    मिट गई जीने की ख्वाहिश कर लें.

    आभार

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  7. किसी अपने की कमी ऐसे एहसास जगा देती है मन में ...

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  8. कल 24/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. भीगा भीगा है समॉ
    और ऑखों में नमी सी है।
    फासले सिमट गए
    बस चंद सॉसे थमी सी है।

    bahut khoob likhi hai aapne.. aabhar..

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