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Thursday, December 29, 2011

दैर ‘ओ’ हरम में भी परवरदिगार नही मिलता...........




जिस्म तो  बहुत  मिलते  है  पर  यहॉं प्यार नही  मिलता
हथेली पर लिए दिल खड़ा हूँ  कोई खरीदार नही मिलता।

कोई तो बताए पता मुझे उस दुकान का 
जो बेचता हो वफा वो दुकानदार नही मिलता।

कैसे करू यकीं तेरी वफा पर तु ही बता
इस बेवफा दुनिया में कोई वफादार नही मिलता।

सुना है वक्त ने भी फेर ली है मुझसे ऑखें
उससे बेहतर कोई राजदार नही मिलता।

अपने ही सब कर्मो का असर है ये ‘अमित’
दैर ‘ओ’ हरम में भी परवरदिगार नही मिलता।

29 comments:

  1. अमित जी, मंदी की मार का असर आपकी इस ख़ूबसूरत और लाजबाब गजल में भी दिख रहा है !:) बहुत सुन्दर प्रस्तुति, खासकर शुरू के दो शेर बहुत सुन्दर है ! दूसरे वाले शेर को मैं कुछ इस अंदाज में कहना चाहूंगा !

    ऐसा भी नहीं कि मैं सिर्फ अपना ही माल बेचने की जुगत में बैठा हूँ,

    खरीदना चाहता हूँ अदद सी वफ़ा, कम्वख्त कोई दुकानदार नहीं मिलता ! :) :)

    वधाई और आपको नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

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  2. वाह बहुत खूब......सभी शेर बढ़िया हैं|

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  3. सब गड़बड़ चल रहा है। नए साल से ही कुछ उम्मीद लगती है।

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  4. बहोत अच्छी प्रस्तुती ।

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  5. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल दिल से निकला वाह वाह .......

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  6. खूबसूरत गजल ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  7. बेहतरीन ग़ज़ल....नववर्ष की शुभकामनायें

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  8. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

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  9. बहुत खुबसूरत... नव वर्ष की हार्दिक शुभकमनाएं...

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  10. बहुत सुन्दर रचना , सादर .

    नूतन वर्ष की मंगल कामनाओं के साथ मेरे ब्लॉग "meri kavitayen " पर आप सस्नेह/ सादर आमंत्रित हैं.

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  11. शानदार..जानदार गजल

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  12. नव वर्ष की आप सभी को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनायें। आज तो ब्लॉग जगत में गज़लें धूम मचा रही हैं। "अपने ही सब कर्मो का असर है ये ‘अमित’ दैर ‘ओ’ हरम में भी परवरदिगार नही मिलता।" बहुत ख़ूब्।

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  13. नव-वर्ष 2012 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

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  14. बहुत ख़ूब... नव वर्ष की हार्दिक शुभकमनाएं...

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  15. आपको और परिवारजनों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  16. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  17. सुना है वक्त ने भी फेर ली है मुझसे ऑखें
    उससे बेहतर कोई राजदार नही मिलता।

    अच्छे भाव, अच्छी ग़ज़ल।
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  18. बहोत अच्छा लगा आपका ब्लॉग पढकर ।

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  19. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

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  20. क्‍या बात है....बहुत ही उम्‍दा गजल लगी आपकी। बधाई।

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  21. अपने ही सब कर्मो का असर है ये ‘अमित’
    दैर ‘ओ’ हरम में भी परवरदिगार नही मिलता।
    ...वाह!

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  22. बहुत अच्छी ग़ज़ल ........
    बधाई...

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    http://dilkikashmakash.blogspot.com/

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  23. bahut khoob gazal Amit jii .....lutf aa gaya

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