इस ब्लाग की सभी रचनाओं का सर्वाधिकार सुरक्षित है। बिना आज्ञा के इसका इस्तेमाल कापीराईट एक्ट के तहत दडंनीय अपराध होगा।

Monday, September 27, 2010

सपनों से भी आगे





आओ मेरे साथ
तुम्हें लेकर चलता हूं मैं
सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में।
जहां तेरा प्यार फैला है
आसमां की तरह
हवाओं की जगह फैली है
तेरे जिस्म की भीनी-भीनी सी खुश्बू।
आओ मेरे साथ
तुम्हें लेकर चलता हूं मैं
सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में।
जहां बादलों की जगह
लहरा रही है तेरी जुल्फें
तेरी आंखों जैसी गहराई है समन्दर में
फूलों में चटख रही है
तेरे सुर्ख गुलाबी गालों की रंगत।
आओ मेरे साथ
तुम्हें लेकर चलता हूं मैं
सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में।
जहां दिन शुरू होता है
तेरी एक अंगड़ाई से
पलकों की जुिम्बश से
जहां बिखर जाती है शाम
पंछियों ने सीखा है गाना
तेरी पायल की रूनझुन से
पेड़ों ने फैला रखा है
जहां तेरे आंचल की छांव।
आओ मेरे साथ
तुम्हें लेकर चलता हूं मैं
सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में।

11 comments:

  1. वाह, खूबसूरत अनुभूति...उत्तम रचना..बधाई. कभी 'शब्द-शिखर' पर भी पधारें.

    ReplyDelete
  2. अच्छी पंक्तिया लिखी है ........

    जाने काशी के बारे में और अपने विचार दे :-
    काशी - हिन्दू तीर्थ या गहरी आस्था....

    ReplyDelete
  3. कौन खुशनसीब है वह, शायर साहब !!!
    जिसके लिए इतने खूबसूरत अलफ़ाज़ मै आप लिख बैठे हैं:
    "आओ तुम्हे चाँद पर ले जाए.....
    एक नई दुनिया बसाए "

    ReplyDelete
  4. amit ji bahoot hi achchhe khyal hai.... bahoot sunder abhivayakti

    ReplyDelete
  5. बहुत ही सुन्दर कविता.

    ReplyDelete
  6. एक गंभीर रचना!!! बहुत प्यारी !!!!!!
    कभी भटकते भटकते " आवारगी" पर भी नज़र -ऐ--इनायत करें.

    ReplyDelete
  7. bahut badiya rachna....

    Please Visit My Music Blog For Music Songs...
    Download Direct Hindi Music Songs And Ghazals

    ReplyDelete
  8. सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

    ReplyDelete
  9. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को |

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete