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Sunday, February 6, 2011

अधुरी ख्वाहिशे








चलते-चलते यूॅ ही मैंने
पीछे मुड़कर देखा
दूर दूर तक तुम
कहीं नही थी।
नजर आए भी तो
कुछ अधुरी ख्वाहिशे
और
कुछ कुचले हुए जज्बात।
तेरी बेवफाई के
पॉवों से घायल
वफा की राहों में
यहॉ वहॉ बिखरे हुए।

19 comments:

  1. बहुत खूब, दिल के जज्बातो को खूबसूरत शब्द दिये है आपने
    शुभकामनाये

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  2. वाह ! क्या बात है, बहुत ही सुन्दर

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  3. यहाँ वहाँ बिखरे हुए थे.....अब क्या कहें.

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  4. खुबसूरत अहसासों को समेटे ,दिल कि गहराई से लिखी गयी रचना ,बधाई

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  5. sudar kavita. utne hi sundar chitr ka chunav.

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  6. "ला-जवाब" जबर्दस्त!!

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  7. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं

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  8. मन के भावों का सुन्दर चित्रण किया है। शुभकामनायें।

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  9. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  10. ....................
    कुछ अधूरी ख्वाहिशें
    .................कुछ
    कुचले हुए जज्बात ....
    बड़ी गहरी चोट दे रही है कोमल रचना अमित भाई !

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  11. कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया ,भाई.
    सलाम

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  12. आप बोल गये कि हम बगले के हैं आपके, जबकि आप त हमरे ससुराल के हैं.. चलिये ऊ सब दीगर बात! आपका नज़्म बहुत अच्छा लगा.. बिबिध बिसय पर लिखिये, आपमें प्रतिभा है!!
    इस पर तबस एतने कहेंगे कि
    हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी किहर ख़्वाहिश पे दअम निकले,
    बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले!!

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  13. आपके उदगार मन को आंदोलित कर गए। हमरो पोस्ट पर आपन विचार दीजिएगा। हम भी आपके नजदीक ही हैं।धन्यवाद।

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  14. पीछे मुड़ कर मत देखिए जनबा,, जिंदगी आगे बढ़ते जाने का नाम है। रही बात वेबाफाई तो गालिब ने कहा है कुछ तो मजबूरियां रही होगी यूं ही कोई वेवफा नहीं होता।

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  15. कुछ कुचले हुए जज्बात।
    तेरी बेवफाई के
    पॉवों से घायल...

    waah ! Beautiful !

    .

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  16. बहुत बढियाँ !!

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  17. तेरी बेवफाई के
    पॉवों से घायल
    वफा की राहों में
    यहॉ वहॉ बिखरे हुए।

    क्या खूब कही आपने . बेहद मार्मिक और सुंदर प्रस्तुति.....................
    .
    सैनिक शिक्षा सबके लिये अनिवार्य हो

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