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Tuesday, December 21, 2010

कभी रोते तो कभी मुस्कुराते रहे


चित्र गुगल साभार

जिस्त टुकड़ों में हम बिताते रहे
कभी रोते तो कभी मुस्कुराते रहे।


शमॉं भी बुझ गई तेरे इंतजार में
रौशनी के लिए दिल को जलाते रहे।


किसी ने कहा जो संगदिल तुझे
तेरी वफा के किस्से सुनाते रहे।


लोगों ने पुछा दैरो हरम का पता हमसे
तेरे घर की तरफ उगंलियॉं उठाते रहे।


वो जख्म दर जख्म देते रहे ‘अमित’
और हम रस्म-ए-मोहब्बत निभाते रहे।


16 comments:

  1. amit ji, bahoot hi gahre bhav hai gazal men..........dil men utarti hui.

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  2. वो जख्म दर जख्म देते रहे ‘अमित’
    और हम रस्म-ए-मोहब्बत निभाते रहे।

    ये इश्क है भाई.इसमें यही होता है

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  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  4. वाह,क्या बात है!

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  5. wah ji wah.. bahut badiya..

    Please visit my blog..
    Lyrics Mantra

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  6. लोगों ने पुछा दैरो हरम का पता हमसे
    तेरे घर की तरफ उगंलियॉं उठाते रहे।

    umda ghazal!

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  7. वाह,क्या बात है...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ।

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  8. Merry Christmas
    hope this christmas will bring happiness for you and your family.
    Lyrics Mantra

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  9. लोगों ने पुछा दैरो हरम का पता हमसे
    तेरे घर की तरफ उगंलियॉं उठाते रहे।
    खुबसूरत गज़ल हर शेर दाद के क़ाबिल, मुबारक हो

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  10. लोगों ने पुछा दैरो हरम का पता हमसे
    तेरे घर की तरफ उगंलियॉं उठाते रहे।

    हरेक शेर लाज़वाब..बाहर सुन्दर गज़ल

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  11. जितनी तारीफ़ की जाय कम है ।
    सिलसिला जारी रखें ।
    आपको पुनः बधाई ।

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  12. This comment has been removed by the author.

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  13. सुन्दर रचना, बधाई.....

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